सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

एक देवी हो तुम... संध्या शर्मा


सक्षम / सृजक 
संस्कारों एवं
सृष्टि का आधार
जिम्मेदार/समझदार
प्रकृति का अनमोल उपहार
पालनहार
मौन/प्राण/ अपान
ममता/सत्य 
ललकार
क्षमताओं से परिचित
संदेहों से प्रभावित
अधिकारों से वंचित
नारी नहीं
देवी हो तुम

29 टिप्‍पणियां:

  1. देवी हो तुम अधिकार न मांगो
    सारी कायनात तुम्हारी ये जानो
    छल जाते प्रशंसा के चंद शब्द
    नारी हो तुम अब सच पहचानों

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  2. प्रभावितअधिकारों से वंचित
    नारी नहीं
    देवी हो तुम
    ...........नारी तो है ही देवी

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  3. बहुत बहुत सुन्दर....

    बधाई..

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  4. वंचित पर असीम सामर्थ्य ... क्योंकि नारी नहीं माँ हो तुम

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  5. नारी को नारी रहने दो
    मत देवी बनाओ
    ये झूठे आडंबरो मे
    ना उसे फ़ंसाओ

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  6. कल 07/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. सच में देवी हो ! अगर अपनी ताकत को पहचान सको तो ..!

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  8. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  9. सच में नारी देवी है. सुंदर अभिव्यक्ति.

    बधाई.

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  10. निसंदेह नारी देवी नारी शक्ति है
    बहुत बेहतरीन रचना,लाजबाब प्रस्तुति,

    NEW POST...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

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  11. नारी ही सृष्टि की जनक होती है.....
    गहरे भाव लिए सुंदर रचना।

    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  12. बस देवी ही बनी रहो.....सुंदर शब्दों में खरी बात ,

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  13. नारी शक्ति,संयम,सामर्थ और सहशीलता की गाथा है....सुन्दर रचना...

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  14. नारी सच में देवी हो होती है ... पर आज पुरुष उस देवी को अपने अधीन रखना चाहता है .. उसकी शक्ति को नहीं मानना चाहता है ...

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  15. सटीक ,सार्थक अभिव्यक्ति....

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  16. Insaan apne karm se mahaan banta hai..

    na to naari sirf naari bhar hone se devi ho jaati hai..
    aur na hi baaki koi insaan.. :)

    sundar rachna :)

    palchhin-aditya.blogspot.in

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  17. क्या बात है ! सुन्दर और अर्थपूर्ण पंक्तियाँ.

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  18. मां पत्नी बेटी बहन देवियां हैं ; चरणों पर शीश धरो !!
    मुझे अपने गीत की याद हो आई …

    आदरणीया संध्या जी
    सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सुंदर है आपकी कविता , आभार !
    नारी, नारी है इस कारण देवी भी है…
    नारी का हर रूप वंदनीय है !

    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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