सोमवार, 26 मार्च 2012

किनारा... संध्या शर्मा

डूबने के भय से
तैरना छोड़ दूँ
इतनी कमजोर नहीं
हाँ! तय कर रखी है
एक सीमा रेखा
उसके आगे नही जाना
जानती हूँ
सागर असीम, अनंत
पार नहीं कर सकती हूँ
लेकिन हार नहीं मान सकती न
जीना चाहती हूँ
उस आलौकिक क्षण को
जब तैरना सीख जाउंगी
उतर जाउंगी उस पार
सीमित होकर भी
असीमित में विलीन
आकार से निराकार
शायद उसी दिन
मिल जायेगा किनारा...

29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर..........

    सागर असीम, अनंत
    पार नहीं कर सकती हूँ
    लेकिन हार नहीं मान सकती न
    जीना चाहती हूँ

    आत्मविश्वास से भरी....
    सस्नेह.

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  2. डूबने का भय होता है , पर किनारे की चाहत ही किनारा देती है

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्टस पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  4. सागर असीम, अनंत
    पार नहीं कर सकती हूँ
    लेकिन हार नहीं मान सकती न
    जीना चाहती हूँ

    Bahut Sunder Bhav....

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  5. दृग देख जहां तक पाते हैं...
    बच्चन जी की पंक्तियाँ याद आ रहे हैं....
    सुंदर रचना... सादर।

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  6. सीमित होकर भी
    असीमित में विलीन
    आकार से निराकार
    शायद उसी दिन
    मिल जायेगा किनारा...


    सुंदर अभिव्यक्ति. शानदार.

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  7. कोशिश करने वालो की हार नहीं होती....बहुत सुन्दर...

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. "सीमित होकर भी
    असीमित में विलीन
    आकार से निराकार"

    बेहद सुंदर भाव..!!

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  10. हौसला है तो सहारा ,किनारा है .सुन्दर लिखा है ..

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  11. रश्मि प्रभा जी की बात से पूर्णतः सहमत हूँ।

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  12. हौसला रहे तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है ....बहुत सुन्दर पोस्ट।

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  13. आत्मविश्वास से भरी रचना ... ओज़स्वी ... अंतरात्मा को हिम्मत देती ... कुछ भी नहीं मुश्किल जहां में ...

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  14. सीमाओं को पहचानना संभावनाओं की ओर एक कदम रख देने से कमतर नहीं है . मन को ऊर्जित करती है यह रचना .

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  15. उतर जाउंगी उस पार
    सीमित होकर भी
    असीमित में विलीन
    आकार से निराकार
    शायद उसी दिन
    मिल जायेगा किनारा..

    ....आत्म-विश्वास से परिपूर्ण बहुत प्रभावी अभिव्यक्ति...आभार

    http://aadhyatmikyatra.blogspot.in/

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  16. बहुत सुन्दर , सार्थक सृजन.

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  17. बहुत ही अच्छी बात कही है...
    हौसला है तो उड़ान है....
    बहुत ही सुन्दर,सार्थक रचना...

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  18. किनारा दिखाई देता हो तो पार करने की इच्छा बनी रहती है। सही दिशा में प्रयास करने पर किनारा मिल ही जाता है। जहां ओर-छोर नहीं वहां भी छोर दिखाई देने लगता है। सुंदर भाव अभियक्त करती रचना।

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  19. बहुत सुंदर रचना,बेहतरीन भाव अभिव्यक्ति, इस रचना के लिए आभार " सवाई सिंह "

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  20. बढ़िया,आत्मविश्वास से ओतप्रोत पोस्ट .

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  21. बहुत खूब सुंदर रचना,
    बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....

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  22. सागर असीम, अनंत
    पार नहीं कर सकती हूँ
    लेकिन हार नहीं मान सकती न
    जीना चाहती हूँ
    उस आलौकिक क्षण को
    जब तैरना सीख जाउंगी
    उतर जाउंगी उस पार
    सुन्दर भाव ...कोमल रचना ...आत्मविश्वास बढाती रचना ....
    राम नवमी की हार्दिक शुभ कामनाएं इस जहां की सारी खुशियाँ आप को मिलें आप सौभाग्यशाली हों गुल और गुलशन खिला रहे मन मिला रहे प्यार बना रहे दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति होती रहे ...
    सब मंगलमय हो --भ्रमर५

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